मंगलवार, 29 सितंबर 2015

तुझे पाने की तमन्ना

तुझे पाने की तमन्ना तो आज भी है,बस जिक्र करना छोड़ दिया है ।
मेरी सांसों के सुर में तो तुम आज भी हो,बस हमनें सुनाना छोड़ दिया है।
 मेरी नज़रों को जुस्तजू तो तेरी आज भी है,बस मेरी आँखों ने रात भर सोना छोड़ दिया है।
मोहब्बत में दर्द तो मुझे आज भी हैं,बस याद में उनकी रोना छोड़ दिया है।
तुझमें खो जाने की चाहत तो आज भी है,बस   मरने की आरज़ू में जीना छोड़ दिया है।

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