अश्क बहते रहे,दिल रोता रहा,
तेरे इंतजार में
मोहब्बत की बस्ती मेरी उजड गयी
बैचेन सा मन मेरा ख्वाब तेरे पिरोता रहा
तेरे इंतजार में
दर्द को मेरे ना कोइ किनारा मिला
ना मंजिल मिली ना सफर मिला
फिर भी मैं बहता रहा
तेरे इंतजार में
ना जमीं मिली ना आसमां मिला
मुझे तेरे दिल के सहरा में
बस कांटों भरा गम का सेज मिलता रहा
तेरे इंतजार में
तेरे इंतजार में
मोहब्बत की बस्ती मेरी उजड गयी
बैचेन सा मन मेरा ख्वाब तेरे पिरोता रहा
तेरे इंतजार में
दर्द को मेरे ना कोइ किनारा मिला
ना मंजिल मिली ना सफर मिला
फिर भी मैं बहता रहा
तेरे इंतजार में
ना जमीं मिली ना आसमां मिला
मुझे तेरे दिल के सहरा में
बस कांटों भरा गम का सेज मिलता रहा
तेरे इंतजार में
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