शनिवार, 5 सितंबर 2015

मन तेरी ओर चले

खुले आसमान के तले,मतवाली पवन चले।
सूरज डूब रहा,अपने घरों को पंछी निकले।
शाम ढले,शाम ढले ,ये शाम ढले।
डूब रहा हूँ मैं भी तुझमें,
धड़कन बनके दिल में जब तू धड़के,
 मन मेरा तेरी ओर चले,
तेरी ओर चले,बस तेरी ओर चले।
Avi  💘

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